क्यों जरूरी हैं हर समय भगवान का नाम लेना ? एक ही नाम को बार-बार जपने से क्या बदलाव होगा ज़िंदगी में!
आइये जानते हैं की भगवान का नाम जपने से क्या होता हैं - उस परमात्मा ( जो सृष्टि का संचालन कर्ता हैं) द्वारा भेजे गए धर्म के रक्षको के कई नाम हैं ।
इस संसार में अनेक धर्म हैं जहाँ लोग भगवान के नाम का सिमरन करते हैं जैसे भारत में, सनातन धर्म के लोग उस परमात्मा को श्री राम, श्री कृष्ण आदि और इस्लाम धर्म के अल्लाह , ईसाई धर्म के यीशु और सिख धर्म के गुरुओ के उपदेश और बाणी का जाप एवं सिमरन करते हैं।
जैसा की सिख धर्म में गुरबाणी का उपदेश हैं कि -
"कोई बोले राम राम कोई खुदाए, कोई सेवै गोसैया कोई अल्लाहे, कारण करण करीम, कृपाधार रहीम" (उस परमात्मा के नाम अनेक हैं पर करने वाला एक हैं)
दार्शनिक रूप से
अगर हम दार्शनिक रूप से देखे जब भी कोई व्यक्ति मन और तन से भगवान के नाम का सिमरन करता हैं तो वह केवल अक्षरो या नाम को नही पढ़ रहा होता बल्कि वह परमात्मा के गुणो, सरगुन और निरगुण सरूप को भी बार बार अपने अंदर-बाहर महसूस कर रहा होता हैं। जिससे उस व्यक्ति के अंदर सदगुणो जैसे सदभावना का विकास होना, हर जगह हर इंसान में प्रभु की छवि को देखना इत्यादि का विकास शुरू होने लगता हैं और अपने अंदर के विकार जैसे काम , क्रोध , लोभ, मोह, अहंकार का नष्ट होना शुरू हो जाते हैं जिससे जीवन धीरे धीरे सुखी बनता चला जाता हैं।
वैज्ञानिक रूप से
आज विज्ञान अपनी चरम सीमा पर हैं। विज्ञान के अनुसार, ध्वनि का प्रभाव हमारे मन, शरीर और वातावरण पर गहरा असर डालता है। यह प्रभाव सकारात्मक या नकारात्मक दोनों ही सकता है, जो ध्वनि के प्रकार और उसके प्रति हमारी संवेदनशीलता पर निर्भर करता है। नीचे कुछ प्रमुख प्रभाव दिए गए हैं:
1. मानसिक प्रभाव
- सकारात्मक ध्वनियाँ: जैसे संगीत, मंत्र, या प्राकृतिक ध्वनियाँ (पक्षियों का गाना, झरने की आवाज़) मन को शांत और सुकून देती हैं।
- नकारात्मक ध्वनियाँ: जैसे तेज़ शोर, अनचाही आवाज़ें या कर्कश ध्वनियाँ, तनाव, चिंता और चिड़चिड़ापन उत्पन्न कर सकती हैं।
2. आध्यात्मिक प्रभाव
- मंत्र और ध्वनियों का जप: मंत्रो या ध्वनि कंपन से ध्यान में गहराई आती है और आत्म-विश्वास का विकास होता है।
विज्ञान कहता हैं यदि ध्वनि को सही तरीके से समझा और उपयोग किया जाए, तो यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाने का एक प्रभावी साधन बन सकती है।
इसलिए व्यक्ति को अपने मानसिक विकास के लिए , अपने अंदर छिपे विकारो को नष्ट करने के लिए उस परमात्मा का नाम सिमरन के साथ उनके असूलो को भी अपने जीवन में धारण करना चाहिए
वाहेगुरु जी का खालसा। वाहेगुरु जी की फतेह ।
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