AMRITVELA MEIN GURBANI KYUN PADHTE HAIN? अमृत वेला में सिमरन क्यों करते हैं? सिमरन से क्या होता है ?


AMRITVELA MEIN GURBANI KYUN PADHTE HAIN

अमृतवेला सिख धर्म में एक पवित्र समय है, जिसे प्रातःकाल (लगभग 3:00 बजे से 6:00 बजे तक) माना जाता है। 

इस समय गुरबानी पढ़ने और सिमरन करने का विशेष महत्व है। इसका कारण यह है कि यह समय आत्मिक और मानसिक शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यहाँ कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं कि अमृतवेला में गुरबानी , सिमरन , भजन क्यों पढे जाते है:

1. सुबह शांति भरा वातावरण:

प्रातःकाल का समय शांति और पवित्रता से भरपूर होता है। इस समय मन शांत होता है, और ध्यान केंद्रित करना आसान होता है। गुरबानी के अर्थों को समझने और अनुभव करने के लिए यह समय सबसे उपयुक्त है।

2. अपनी खोज करना:

गुरु नानक देव जी ने सिखाया है कि अमृतवेला में उठकर गुरबानी का अभ्यास करना हमें परमात्मा से जोड़ता है। जपुजी साहिब में लिखा है:

"अमृत वेला सच नाउ वडियाई वीचार।"
इस समय की गई सिमरन और गुरबानी पाठ से आत्मिक शक्ति बढ़ती है।

3. बुरे विचारो पर काबू: 

सुबह-सुबह गुरबानी पढ़ने से हमारा मन नकारात्मक विचारों से दूर रहता है। यह हमारी सोच को सकारात्मक और पवित्र बनाती है।

4. तनाव से मुक्ति:

गुरबानी पढ़ने से मानसिक तनाव कम होता है। यह हमारे चित्त को शांत करती है और दिनभर के लिए ऊर्जा प्रदान करती है।

5. रहत मर्यादा के अनुसार:

सिख रहत मर्यादा के अनुसार, अमृतवेला में उठकर नितनेम (जपुजी साहिब, जाप साहिब, आनंद साहिब आदि) का पाठ करना जरूरी है। यह गुरु के आदेशों का पालन करने का प्रतीक है।

निष्कर्ष:

अमृतवेला में गुरबानी पढ़ने से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है। यह समय ईश्वर से जुड़ने और आत्मा को पवित्र करने का सबसे उत्तम अवसर है।


अगर आप इस विषय पर और जानकारी चाहते हैं, वैबसाइट पर जाए और गुरबानी व सिख धर्म के बारे जाने  lifewithGurbani.com

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